Mutual Fund क्या है? Mutual Funds – Definition, Types And Benifits in Hindi

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mutual Fund kay hai. what is mutual fund in hindi
Mutual Fund In Hindi

म्यूचुअल फंड एक ऐसा फंड होता है जो बहुत सारे लोगों से पैसा जुटकर उन पैसों को अलग अलग ऐसेट क्लास यानी संपत्तियों में निवेश करता है। इस फंड को ऐसेट मैनेजमेंट कंपनीयों द्वारा चलाया जाता है। जिनके पास एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर होता है जो निवेशकों के पैसों को मैनेज और निवेश करता है।

आज के समय में अपने पैसों को निवेश करने के लिए लोगों के पास बहुत सारे विकल्प आ चुके हैं। इन्हीं में म्यूचुअल फंड भी एक अच्छा विकल्प है। इसकी खास बात यह है कि इसमें निवेश करने के लिए आपको investment, Finance और stock market कि जानकारी होना आवश्यक नहीं है।

जिन्हें अपने पैसों को कहीं पर निवेश करना है और बैंक FD से अधिक और महंगाई से ज्यादा रिटर्न कमाना है ऐसे लोगों को mutual fund के बारे में जानना जरूरी है।

इसलिए आज हम इस आर्टिकल में जानेंगे Mutual Fund क्या होता है? म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है? कितने प्रकार के म्यूचुअल फंड होते हैं? कैसे हम अपने लिए एक अच्छा म्यूचुअल फंड का चुनाव कर सकते हैं। ऐसे ही Mutual Fund से संबंधित हर सवाल का जवाब आज हम इस आर्टिकल में देने की कोशिश करेंगे।

Table of Contents

Mutual Fund क्या है? What is Mutual Fund in Hindi

Mutual Fund एक ऐसा फंड होता है जो बहुत सारे लोगों से पैसा जुटकर अलग अलग ऐसेट क्लास यानी संपत्तियों में निवेश करता है और लोगों को उनके निवेश पर अच्छा रिटर्न (returns) देने कि कोशिश करता है।

Mutual Fund एक निवेश योजना है जिसे कहीं प्रोफेशनल asset management company’s – AMC’s द्वारा चलाया जाता है। जिनके पास स्टॉक मार्केट और फाइनेंस का अच्छा विश्लेषण करने वाले फंड मैनेजर होते हैं।

इस योजना के तहत AMC कंपनीयां बहुत सारे निवेशकों से पैसा जुटा कर अलग अलग प्रकार के ऐसेट क्लास में यानी अलग अलग संपत्तियों में वह पैसा निवेश करते है। इन संपत्तियों में Stock’s, Bond’s, Real estate प्रोपर्टी, Debentures, Gold जैसे और भी संपत्तियां हो सकती है।

इन संपत्तियों से मिलने वाले रिटर्न्स को उस म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों में बांटा जाता है। म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों से फंड को जुटाने, फंड को मैनेज करने और सही जगह पर निवेश करके निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने के बदले कुछ Fees यानी शुल्क लेती है। जो आम तौर पर बहुत कम होता है।

Mutual fund Highlights

  • म्यूचुअल फंड एक ऐसा फंड होता है जो बहुत सारे निवेशकों से पैसा जुटकर उन पैसों को अलग अलग ऐसेट क्लास यानी संपत्तियों में निवेश करता है। Mutual fund ने निवेश किए गए संपत्तियों के संग्रह को उस म्यूचुअल फंड का Portfolio कहा जाता है।
  • Mutual Funds को उसके उद्देश्य, उसे किस प्रकार की संपत्तियों में निवेश करना है और उस फंड से कितना रिटर्न मिलता है इन सबके आधार पर अलग अलग प्रकार और कैटेगरीज में बाटा जाता है।
  • म्यूचुअल फंड कि वजह से नए और छोटे निवेशकों को भी एक अच्छे से मैनेज portfolio में निवेश करने का मौका मिलता है।
  • Mutual Funds आपके पैसों को मैनेज करने के बदले Annual Fees, Expense Ratio जैसे शुल्क लेता है। जो आपके रिटर्न को प्रभावित करता है।

म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है? How Mutual Fund works

Mutual Fund क्या होता है जानने के बाद अब आपको यह जानना भी जरूरी है कि म्यूचुअल फंड काम कैसे करते हैं। जिससे म्यूचुअल फंड्स को आप और भी अच्छे तरीके से समझ पाएंगे।

Mutual Fund कैसे काम करता है यह समझने से पहले आपको बता दें कि म्यूचुअल फंड एक कंपनी ना होकर यह एक AMC’s – Assets Manegement Company’s द्वारा ही चलाए जाने वाला फंड होता है। एक ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के अलग-अलग प्रकार के mutual fund स्कीम्स हो सकतें हैं।

Mutual Fund में AMC’s – asset management company’s यानी म्यूचुअल फंड कंपनियां लोगों को अलग अलग प्रकार के म्यूचुअल फंड स्कीम उपलब्ध कराते हैं।

जब Mutual Fund कंपनी अपना कोई फंड लॉन्च करती है तो इसके साथ वह उस फंड कि कैटेगरी और प्रकार, उसमें निवेशक कम से कम कितना निवेश कर सकते हैं, उस fund का fund manager कौन है यह सारी जानकारी देती है।

फिर जिन लोगों को यह म्यूचुअल फंड सही लगता है वह लोग इस म्यूचुअल फंड में अपने पैसों को निवेश करते हैं। इन्हीं लोगों को निवेशक कहा जाता है।

जैसे स्टॉक मार्केट में निवेश करने के बदले निवेशकों को शेअर्स मिलते हैं वैसे ही म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को उनके पैसों के निवेश के आधार पर म्यूचुअल फंड के युनिट्स (Units) मिलते हैं। निवेशकों को मिलने वाले हर युनिट की एक वैल्यू होती है जिसे (NAV – Net asset value) के नाम से जाना जाता है। NAV क्या होता है इसे हम आगे विस्तार से जानेंगे।

अब इस fund में लोगों ने निवेश किया सारा पैसा जिसे asset under manegement – AUM कहते हैं इसे एक फंड मैनेजर अलग अलग जगहों पर निवेश करता है। जिसमें शेअर्स, बॉन्ड, गोल्ड, डिबेंचर्स जैसे Asset’a हो सकते हैं।

अब जैसे जैसे इस म्यूचुअल फंड ने निवेश किए Assets की वैल्यू बढ़ती जाती है वैसे वैसे निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिलना शुरू हो जाता है।

Mutual Fund में NAV का मतलब। What is NAV in Mutual Fund in Hindi

NAV का मतलब होता है Net Asset Value. जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते है तो आपको उस म्यूचुअल फंड के कुछ युनिट्स मिलते हैं। इन युनिट्स कि वैल्यू यानी कीमत को ही NAV कहा जाता है।

NAV वह कीमत होती है जिस कीमत पर आपको Mutual Fund के युनिट्स खरीदने मिलते हैं या जिस कीमत पर आप म्यूचुअल फंड युनिट्स को बेचते हैं।

निवेशकों को उनके निवेश के आधार पर म्यूचुअल फंड के युनिट्स मिलते हैं। जो NAV के अधार पर तय होते हैं।

उदाहरण के लिए यदि आप 40 रुपए NAV वाले किसी म्यूचुअल फंड में 5000 रूपए निवेश करते है, तो आपको इस म्यूचुअल फंड के 5000/40 के आधार पर 125 युनिट्स मिलेंगे।

अब जैसे जैसे आपके म्यूचुअल ने निवेश किए Assets कि वैल्यू बढ़ेगी या कम होगी वैसे वैसे आपके युनिट्स के NAV कि वैल्यू कम ज्यादा होगी।

म्यूचुअल फंड के युनिट्स के NAV के कीमत पर ही निवेशकों का रिटर्न तय होता है। मान लेते है अगर आप ने किसी म्यूचुअल फंड में 10 रुपए NAV वाले 10 युनिट्स खरीदें जिसकी कीमत बाद में 15 रूपए हो गई तो यहां पर आपको 5 रूपए का रिटर्न मिलेगा।

NAV कि कीमत हर दिन स्टॉक मार्केट बंद होने के बाद बदलती हैं। यह शेअर्स कि तरह हर समय नहीं बदलती हैं।

How to calculate nav of mutual fund with example

NAV को निकालने के लिए म्युचुअल फंड के Total Assets से Total Liabilities को घटाकर Total Nomber Of Units से भाग लगाया जाता है।

NAV = Assets – Liabilities ÷ Total Nomber Of Units

NAV का Formula

Mutual Fund में NFO का मतलब। What is NFO in Mutual Fund

NFO का मतलब होता है New Fund Offer यानी जब कोई कंपनी अपना नया म्यूचुअल फंड लाती है तो उसे NFO – New Fund Offer कहा जाता है।

जैसे स्टॉक मार्केट में कोई कंपनी पहली बार अपने शेअर्स बेचने के लिए IPO लाती है। वैसे ही म्यूचुअल फंड कंपनीज़ जब कोई नया म्यूचुअल फंड लॉन्च करती है तब वह उस फंड का NFO लाती है जिसे New Fund Offer कहा जाता है।

जैसे IPO में निवेश करने से हमें कंपनी के शेअर्स मिलते हैं वैसे ही इन म्यूचुअल फंड के NFO में निवेश करने पर हमें म्यूचुअल फंड के युनिट्स (Units) मिलते हैं।

इन युनिट्स की प्राइज आम तौर पर 10 रुपए रखी जाती है। NFO के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए हर म्यूचुअल फंड कंपनीज़ Minimum Nombar of Unit’s को पहले से ही तय करती है। यानी आपको कम से कम कितने युनिट्स खरीदने होंगे यह कंपनी तय करती है। यह संख्या हर म्यूचुअल फंड के के लिए अलग अलग हो सकती है।

म्यूचुअल फंड में निवेश क्यों करें?

जिन्हें अपने पैसों को कहीं पर निवेश करना है लेकिन उन्हें investment के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है ऐसे लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए।

ऐसे लोगों को Mutual Fund में क्यों निवेश करना चाहिए चलिए जानते हैं।

  • Professional Management :- जिन लोगों को investing के बारे में ज्यादा या कुछ भी नॉलेज नहीं है ऐसे लोगों के लिए म्यूचुअल फंड निवेश का एक अच्छा विकल्प होता है। क्योंकि म्यूचुअल फंड में उनके पैसों को एक फुल टाइम प्रोफेशनल फंड मैनेजर मैनेज करता है और निवेश करता है। जिसे investing, stock market और finance के विश्लेषण का अच्छा अनुभव और नॉलेज होता है।
  • Diversification :- म्यूचुअल फंड आपसे लिए पैसों को अलग अलग प्रकार के Assets में निवेश करता है। जिससे आपके निवेश portfolio को Diversification का फायदा मिलता है। इससे आपके निवेश का जोखिम कम हो जाता है।
  • Multiple Choice :- म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक और कारण यह है कि म्यूचुअल फंड कंपनीज़ आपको बहुत सारे प्रकार के म्यूचुअल फंड उपलब्ध कराते हैं। इसमें आपको अपने हिसाब से अपना पसंदीदा म्यूचुअल फंड का चुनाव करने की सुविधा मिलती है।
  • Transparency :- Transparency का मतलब होता है पारदर्शिता। हर म्यूचुअल फंड कंपनी अपने म्यूचुअल फंड्स के बारे में सारी जानकारी अपनी Official Website पर उपलब्ध कराती है। जिसमें उस म्यूचुअल फंड के होर्डिंग्स, फंड मैनेजर, म्यूचुअल फंड की साइज़ यानी वह कितना कैपिटल अभी मैनेज कर रहा है यह सारी जानकारी होती है। इसके अलावा AMC’s के साइट पर NAV – Net asset value हर दिन अपडेट होता रहता है। इन सबके वजह से म्यूचुअल फंड और निवेशकों के बीच (Transparency) पारदर्शिता बनी रहती है।
  • Well Regulated :- भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को रेगुलेट करने का काम capital market regulator सेबी यांनी Securities and Exchange Board of India (SEBI) द्वारा किया जाता है। जिसमें म्यूचुअल फंड कंपनीज़ को बहुत सारे नियम और शर्तों के साथ निवेशकों के सुरक्षा, जोखिम को कम करने और तरलता के ध्यान के साथ किसी भी म्यूचुअल फंड को चलाना पड़ता है।
  • Liquidity :- Liquidity का मतलब होता है तरलता। यानी आप जब चाहें म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं और जब चाहे म्यूचुअल फंड स्कीम को रिडीम कर सकते हैं। बाद में दो या तीन दिनों के अंदर आपके पैसे आपके बैंक अकाउंट में आ जाएंगे। लेकिन अगर आपका म्यूचुअल फंड क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड है तो आप maturity date से पहले अपने म्युच्युअल फंड को रिडीम नहीं कर सकते। क्योंकि क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड तीन साल के लॉक इन पीरियड के साथ आते हैं।

Mutual funds के प्रकार? Types of Mutual Funds in Hindi

Mutual funds को कहीं सारे चीजों के आधार पर अलग अलग कैटेगरी में विभाजन किया जाता है। इन कैटेगरीज में भी म्यूचुअल फंड्स के अलग-अलग प्रकार पड़ते हैं। आज हम आपको म्यूचुअल फंड्स के उन लोकप्रिय प्रकारों के बारे में बताएंगे जिनके बारे में हमें हमेशा सुनने को मिलता है।

types of mutual funds in hindi / म्यूचुअल फंड्स के प्रकार
Types of Mutual Funds

संरचना के आधार पर म्यूचुअल फंड्स के प्रकार। basis of the structure:

Mutual Fund के structure यानी संरचना के आधार पर ज्यादातर म्युचुअल फंड्स दो प्रकार के होते हैं। जो कुछ इस प्रकार है :

1. Open-ended mutual fund :- Open ended mutual fund वह म्यूचुअल फंड होते हैं जो निवेशकों को किसी भी समय निवेश करने की अनुमति देते हैं। साथ ही निवेशक अपने हिसाब से इसे रिडीम कर सकते हैं। यह म्यूचुअल फंड किसी भी प्रकार के maturity period के साथ नहीं आते है। इसमें निवेशकों को अपना निवेश किया पैसा वापिस निकालने के लिए किसी भी प्रकार के लॉक इन पीरियड का इंतजार नहीं करना पड़ता।

क्योंकि ऐसे म्यूचुअल फंड में आप अपने समय के हिसाब से निवेश कर सकते हैं और निवेश को रिडीम कर सकते हैं। इसलिए इसे Open ended mutual fund कहा जाता है।

2. Close-ended mutual fund :- यह इस तरह के mutual fund होते है जो एक maturity period के साथ आते है। इस तरह के म्यूचुअल फंड में आप सिर्फ NFO यानी New Fund Offer के जरिए ही निवेश कर सकते हैं। यानी जब यह फंड लॉन्च होता है तभी आप इसमें निवेश कर सकते हैं। साथ ही यह फंड्स लॉक इन पीरियड के साथ आने के कारण इसमें निवेश करने वाले निवेशक अपने पैसे को इस lock in period से पहले रिडीम नहीं कर सकते। यानी इस फंड में निवेशकों को कंपनी ने तय किए समय सीमा तक निवेशित रहना अनिवार्य हो जाता है।

हालांकि सेबी के नए नियम के अनुसार जब ऐसे फंड का maturity period खत्म हो जाए तब इसे स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट किया जाएं जिससे निवेशकों को स्टॉक मार्केट में अपने युनिट्स बेचने में आसानी हो। लेकिन स्टॉक एक्सचेंज पर इन युनिट्स को खरीदने वाले हो तभी आप इसे बेच सकते हैं। ऐसे फंड में लिक्विडिटी की कमी होने के कारण इसमें निवेशकों को रिडीम करने में दिक्कत आ सकती है।

इनके अलावा भी म्युचुअल फंड में संरचना के आधार पर एक और प्रकार का फंड होता है जिसे Interval fund कहते हैं। लेकिन आज बहुत कम ही म्युचुअल फंड Interval fund होते हैं।

Asset Classe के आधार पर म्यूचुअल फंड्स के प्रकार। Types on the basis of asset classes:

कौन सा mutual fund किस तरह के Assets में अपना पैसा निवेश करता है इसके आधार पर म्यूचुअल फंड के अलग-अलग प्रकार पड़ते हैं। जो कुछ इस प्रकार से है :

1. Equity Mutual Funds

Equity Mutual fund वह म्युचुअल फंड्स होते हैं जो Equity में निवेश करते हैं। Equity में यानी स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनियों में निवेश करते हैं। Equity Mutual funds में हमें बाकी सभी म्युचुअल फंड्स की तुलना में सबसे ज्यादा रिटर्न देखने को मिलता है। इसके साथ सबसे ज्यादा जोखिम भी हमें इसी में देखने मिलता है।

अगर आप सीधे तौर पर अपना पैसा स्टॉक मार्केट में लगाना चाहते हैं लेकिन स्टॉक मार्केट की जानकारी नहीं है तो आप Equity Mutual funds में अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।

Equity Mutual Funds के अंदर भी म्युचुअल फंड्स के अलग-अलग प्रकार पड़ते हैं। जो कुछ इस प्रकार हैं :

1. Large Cap Funds :- Large cap म्युचुअल फंड्स वह म्युचुअल फंड होते हैं जो अपना 80% पैसा सिर्फ Large cap कंपनियों के शेयर्स में निवेश करते हैं। Large cap कंपनियों का मतलब होता है जिनका मार्केट कैप 20,000 करोड़ या उससे ज्यादा है ऐसी कंपनियों को Large Cap कंपनियां कहते हैं। जैसे कि Reliance Industries, Tata motors, Adani Green जैसी कंपनियां जिनका मार्केट कैप 20,000 करोड़ से ज्यादा है।

इन large Cap कंपनीयों की लिस्ट (AMFI) द्वारा जारी कि जाती है। AMFI यानी Association of Mutual Funds of India जो भारत के म्यूचुअल फंड कंपनीज़ का एक संघ या कहें संस्था हैं। जिसका काम सेबी लिस्टेड सारी Asset Manegement कंपनीयों को बढ़ावा देना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।

क्योंकि large cap funds अपना 80% पैसा बड़ी कंपनियों में निवेश करते है जो पहले से ही काफी ज्यादा grow हो चुकी है। इसलिए ऐसे फंड में हमें ज्यादा रिटर्न मिलने कि संभावना कम होती है। लेकिन क्योंकि यह कंपनीयां अपने सेक्टर की लीडिंग कंपनीयां होती है इसलिए इनके डुबने का चांस बहुत कम होता है।

इसलिए Large Cap Funds कम जोखिम वाले होते हैं।

2. Mid Cap Funds :- Mid Cap Funds वह म्यूचुअल फंड्स होते हैं जो अपना 65% पैसा Mid Cap कंपनियों में निवेश करते है। यानी जिन कंपनियों का Market Cap 20,000 करोड़ से कम है और 5000 या इससे ज्यादा है ऐसी कंपनियां Mid Cap Company ‘s कहलातीं है।

इसमें लार्ज कैप से ज्यादा रिटर्न मिलने कि संभावना होती है लेकिन जोखिम भी लार्ज कैप fund से ज्यादा होता है।

3. Small Cap Funds :- Small Cap Funds यानी ऐसे फंड्स जो अपना 65% पैसा small cap कंपनीयों में लगाते है। Small Cap कंपनियां यानी जिनका मार्केट कैप 5000 करोड़ से कम है एसी कंपनीयां।

Small Cap Funds में निवेश करने पर large cap और mid Cap फंड्स से ज्यादा रिटर्न मिलने कि संभावना होती है लेकिन क्योंकि यह कंपनीयां बहुत छोटी और शुरुआती दौर में होती है इसलिए इनके डुबने और बंद होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए small cap mutual फंड्स large cap और mid cap funds से ज्यादा जोखिम वाले होते है।

4. Multi cap funds :- मल्टी कैप फंड्स वह फंड्स होते हैं जो सभी प्रकार के market cap वाली कंपनियों में अपना पैसा लगाते है। जैसे कि ऐसे फंड्स large cap, mid cap और small cap में अपना पैसा लगाते है।

5. ELSS (Equity Linked Savings Scheme) :- ELSS म्यूचुअल फंड एक प्रकार के टैक्स सेविंग फंड्स होते हैं। ELSS Funds अपना 80% पैसा Equity में निवेश करते है। ELSS के तहत किया गए निवेश पर Income Tax Act, 1961 कि धारा 80C के तहत आप 1.5 lakh तक का tax बजा सकते हैं। लेकिन इसमें निवेश करने से पहले जान लें कि ELSS Mutual Fund’s तीन साल के look in period के साथ आते है। यानी आप तीस साल से पहले अपना निवेश निकाल नहीं सकते।

6. Index Fund :- Index fund का वह फंड होते हैं जो अपना पैसा किसी Index के आधार पर निवेश करते है। यानी इंडेक्स फंड किसी Index का जैसे कि sensex, Nifty 50 का ही प्रारुप होता है।

उदाहरण के लिए आप किसी कंपनी के nifty 50 इंडेक्स फंड में निवेश करते है तो आपका पैसा उन्हीं 50 कंपनियों में लगेगा जो कंपनीयां अभी nifty 50 index में ट्रेड कर रही है।

Index fund में आप Nifty 50 index fund, Sensex, Bank nifty जैसे index Fund’s में निवेश कर सकते हैं।

2. Debt mutual fund

Debt Mutual funds वह फंड्स होते हैं जो सिर्फ फिक्स रिटर्न देने वाले सिक्युरिटीज में निवेश करते है। यानी ऐसे फंड्स जो अपने पैसों को Government Bond’s, Corporate Bond’s, Debentures, Contract Note’s जैसी सिक्युरिटीज में निवेश करते है। क्योंकि इनका निवेश फिक्स रिटर्न देने वाली संपत्ति में होता है इसलिए यह Funds एक स्टेबल रिटर्न्स दे पाते हैं।

इसलिए Debt म्यूचुअल फंड्स Equity Mutual funds की तुलना में कम जोखिम वाले होते हैं। Debt Mutual Fund के भी अलग-अलग प्रकार होते हैं जो कुछ इस प्रकार है।

1. Liquid Fund :- Liquid Fund वह फंड होते हैं जो short term के लिए मनी मार्केट (Mony market) सिक्युरिटीज में निवेश करते है। जिनमें Sertificate of Deposit, T -bills, Comercial Papers, Term Deposit जैसी सिक्युरिटीज आती है। जिनका ज्यादातर मेच्योरिटी पीरियड 90 दिनों से कम का होता है। इसलिये इसमें Liquidity बनी रहती है और जोखिम कम होता है।

2. Junk Bond Fund :- Junk Bond Funds यानी ऐसे Fund’s जो अपने पैसों को बहुत ही ज्यादा रिस्की संपत्तियों में निवेश करते है। इसलिए इन्हें Junk Bond Scheme के नाम से भी जाना जाता है।

इसमें हमें ज्यादा रिटर्न देखने को मिलते हैं लेकिन इसमें निवेश करने का जोखिम भी सबसे ज्यादा होता है।

3. Glit Funds :- जो Debt mutual fund अपने पैसों को सिर्फ गवर्नमेंट सिक्युरिटीज में निवेश करते है ऐसे Fund’s को Gilt Fund कहा जाता है। यह फंड सिर्फ गवर्नमेंट सिक्युरिटीज में अपना पैसा लगाते है। इसलिए यह 0 जोखिम वाले Funds होते हैं।

उदाहरण के लिए यह अपना निवेश गवर्नमेंट बॉन्ड, Treasury Bills, Treasury Notes, Treasury Bonds जैसी सिक्युरिटीज में करते हैं। यह Gilt Fund भी दो प्रकार के होते हैं। 1) Shot term Gilt Fund 2) Long Term Gilt Fund

4. Fixed Maturity fund :- Fixed Maturity Fund एक फिक्स मैच्योरिटी Date के साभ आते है। यानी यह एक तरह से Bank Fixed deposit के तरह होते हैं। जिनमें निवेश करने के बात आप मैच्योरिटी Date से पहले अपने पैसों को नहीं निकाल सकते।

Fixed Debt Maturity Funds अपने पैसों को ज्यादातर Certificate of diposit, Commercial papers, Corporate Bond’s में निवेश करते है। ऐसे Debt fund में आपको ज्यादातर Fixed deposit से ज्यादा रिटर्न मिलता है।

3. Hybrid mutual fund

Hybrid Funds वह म्यूचुअल फंड्स होते हैं तो जो अपना पैसा Equity और Debt दोनों तरह के Assets में लगाते है। hybrid mutual funds निवेशकों को हर तरह के Assets में अपने पैसों को निवेश करने का मौका देते हैं। हायब्रिड म्यूचुअल फंड एक तरीके से equity fund और Debt fund का मिश्रण होता है।

Hybrid mutual Funds भी मेनली तीन प्रकार के होते हैं। जो कुछ इस प्रकार से है :

1. Monthly Income Plan :- Monthly Income plan यानी MIP Fund’s वह म्यूचुअल फंड्स होते हैं जो अपने पैसों का 65% से 85% तक का निवेश debt securities मैं करते है और बाकी बचा पैसा equity में निवेश करते है।

क्योंकि इनका ज्यादातर निवेश debt securities में होता है इसलिए यह Funds इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा सुरक्षित होते हैं। लेकिन इनका बाकी हिस्सा equity में निवेश होता है इसलिए इसमें थोड़ा जोखिम भी होता है।

2. Balanced Fund :- Balance Fund’s वह म्यूचुअल फंड्स होते हैं जो अपना 65% से 85% तक का पैसा Equity में निवेश करते है और बाकी बचा पैसा Debt securities में निवेश करते है। इस फंड में Equity में किया गया निवेश फंड को अच्छे रिटर्न्स देने में मदद करते हैं और Debt में किया गया निवेश फंड के जोखिम को कम करने में मदद करता है।

यह फंड एक तरीके से आपके रिटर्न्स और जोखिम को बैलेंस करता है। इसलिए इसे Balance Fund कहा जाता है।

3. Arbitrage Fund :- Arbitrage Funds वह फंड्स होते हैं जो मार्केट में मिलने वाले आर्बिट्राज के अवसर का फायदा उठाकर प्रोफिट कमाते हैं। आर्बिट्राज यानी एक ऐसी स्थिति जब cash market और derivative market में किसी शेअर कि प्राइज में gap आ जाता है। इस अवसर का फायदा उठाकर यह फंड्स प्रोफिट कमाते हैं। Arbitrage Funds भी अपना 65% पैसा equity में निवेश करते है और बाकी बचा Debt में निवेश करते है।

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के आधार पर म्यूचुअल फंड के प्रकार। Based on Portfolio Management

Mutual Fund के Portfolio को कैसे मैनेज किया जाता है इसके आधार पर भी म्यूचुअल फंड्स को दो प्रकारों में बाटा जाता है।

1. Active Funds

Active Mutual funds वह फंड्स होते हैं जिन्हें fund manager के द्वारा actively यानी सक्रिय रूप से मैनेज किया जाता है। यानी ऐसे म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजर सक्रिय रूप से तय करता है कि म्यूचुअल फंड का पैसा कहां कहां पर निवेश करना है।

क्योंकि इस तरह के म्यूचुअल फंड में कहां कहां पर निवेश करना है, कहा पर कितना निवेश करना है यह सारे निर्णय फंड मैनेजर सक्रिय रूप से लेता है। इसलिए ऐसे फंड्स को Actively Manege mutual Fund कहा जाता है।

Actively Manege mutual Fund’s का Expense Ratio ज्यादा होता है।

2. Passive Funds

Passive Funds वह फंड्स होते हैं जिन्हें Actively Manege नहीं किया जाता। इस तरह के म्यूचुअल फंड्स में फंड मैनेजर अपना निवेश किसी Index के आधार पर करता है। जैसे कि nifty 50, sensex, Bank nifty जैसे इंडेक्स।

ऐसे फंड में फंड मैनेजर अपना निवेश index के लिस्ट में जितनी कंपनियां होती है उन कंपनियों में उसके वेटेज के आधार पर अपना पैसा निवेश करता है।

क्योंकि इसमें फंड मैनेजर को निवेश करने के लिए ज्यादा सोच समझ कि जरुरत नहीं पड़ती इसलिए ऐसे Mutual funds का Expense Ratio बहुत ही कम होता है।

Passive Fund’s के उदाहरण : Index fund’s, ETF – Exchange Traded Fund

what is regular plan and direct plan in mutual fund

अगर आप किसी भी Mutual Fund में निवेश करने के बारे में सोच रहे है तो आपको म्यूचुअल फंड में Regular Plan और Direct Plan के बारे में जानकारी होना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि इसे जानकार आप अपने लाखों रुपए के Loss को होने से बचा सकते हैं।

Regular plan और Direct Plan यह म्यूचुअल फंड के कोई अलग अलग प्रकार नहीं होते। बस निवेशक इन म्यूचुअल फंड को कैसे खरीदते हैं इसके आधार पर इन्हें अलग-अलग माना जाता है।

किसी भी Mutual Fund को आप दो तरीकों से खरीद सकते हैं।

1) पहला तरीका है आप किसी म्यूचुअल फंड को किसी म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट, एजेंट, ब्रोकर या किसी डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए खरीद सकते हैं। इसमें आपके और म्यूचुअल फंड कंपनीज़ के बीच में एक एजेंट आपको म्यूचुअल फंड स्कीम को बेचता है। इस तरह के म्यूचुअल फंड के निवेश को Regular Plan कहते हैं।

2) दुसरा तरीका है आप सीधे म्यूचुअल फंड कंपनीज़ कि वेबसाईट पर जाकर आप आपके पसंदीदा म्यूचुअल फंड चुनते हैं और उसमें डायरेक्टर निवेश करते है। म्यूचुअल फंड में इस तरीके के निवेश को Direct Plan कहते हैं।

क्योंकि regular plan में निवेशक और म्यूचुअल फंड कंपनीज़ के बीच एक दलाल होता है। इसलिए regular plan का Expense Ratio डायरेक्टर प्लान के Expense Ratio से ज्यादा होता है। इसलिए म्यूचुअल फंड में हमेशा Direct Plan के जरिए ही निवेश करना चाहिए।

क्योंकि long term में हमारे expense ratio में 1%, से 1.5% तक आया अंतर भी हमें लाखों का नुकसान करके जाता है।

क्या Mutual funds में निवेश करना जोखिम भरा है?mutual funds are risky?

जब बात पैसों को कहीं पर निवेश करने की आती है तो सबके मन में एक सवाल जरूर आता है कि क्या यह सुरक्षित (safe) है?

तो इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है।

म्यूचुअल फंड के बारे में आपने यह लाईन जरुर सुनी होगी।

म्यूचुअल फंड निवेश, बाज़ार के जोखिमों के अधीन हैं, योजना से संबंधित सभी दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें।

तो म्यूचुअल फंड किसी भी प्रकार का हो वह मार्केट में अपना निवेश करता है। जिस वजह से यह 100% जोखिम फ्री कभी नहीं होते है।

लेकिन सीधे तौर पर स्टॉक मार्केट या Bond’s में निवेश के बदले म्यूचुअल फंड्स काफी sefe होते हैं। इसके साथ ही म्यूचुअल फंड कंपनीज़ SEBI और AMFI द्वारा रेगुलर होने की वजह से इसमें Scam होने की संभावना भी कम होती है।

म्यूचुअल फंड के लाभ और नुकसान

जैसे किसी चीज़ से हमें लाभ होता है वैसे उस चीज में कुछ नुक़सान या कमियां भी होती है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं।और जब बात अपने पैसों को कहीं पर निवेश करने की हो तो हमें इन दोनों पहलुओं के बारे में जानना जरूरी हो जाता है।

Mutual Funds के भी अपने कुछ लाभ और नुकसान होते हैं। जो म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले हर निवेशक को पता होने चाहिए।

तो चलिए जानते हैं म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लाभ और नुकसान के बारे में…

म्यूचुअल फंड्स के लाभ और नुकसान। Advantages and Disadvantages of Mutual Funds.
Mutual funds Pros and Cons

Mutual funds के लाभ। Benifits of mutual funds

Mutual Fund’s में निवेश करने के लाभ जो कुछ इस प्रकार से है :

1. Returns :- कोई भी म्यूचुअल फंड आपको फिक्स रिटर्न का वादा नहीं करता है। लेकिन जब आप Long Term में यानी लंबे समय तक म्यूचुअल फंड में निवेश करते है तो आपको अपने पैसों पर काफी अच्छा रिटर्न देखने को मिल सकता है। लंबे समय यानी 10 से बीस साल में यह रिटर्न (CAGR-Compound annual growth rate) के आधार पर ज्यादातर 15 से 25% या उससे ज्यादा तक का हो सकता है।

जो कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए एक अच्छा रिटर्न माना जाता है।

Dividend Payments :– म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने से निवेशकों को अपने पैसों पर रिटर्न तो मिलता ही है लेकिन इसके साथ ही कंपनीयों ने जारी किया Dividend भी निवेशकों को मिलता रहता है।

इससे निवेशकों को एक Passive Income मिलने में मदद मिलती है। इसमें कुछ म्यूचुअल फंड्स आपके मिलें हुए डिविडेंड को फिर से आपके म्यूचुअल फंड में निवेश करती है। जिससे आपको म्यूचुअल फंड्स के और युनिट्स मिलते हैं।

Tax Savings :- अगर आपको लंबे समय के लिए अपने पैसों को निवेश करना है और साथ ही अपने Tax को बचाना है, तो आप ELSS Mutual Fund’s में अपने पैसों को निवेश कर सकते हैं। इसके तहत आप 1,50,000 तक का income tax बचा सकते हैं।

Cost-effective :- म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक और लाभ यह है कि यह काफी cost effective निवेश विकल्प है। यानी अगर किसी इंसान को बड़ी बड़ी कंपनियों के शेअर्स खरीदने है और उसके पास इतना पैसा नहीं है, तो वह म्यूचुअल फंड में थोड़े से पैसों को लगाकर ही इन सारी कंपनीयों में निवेश करने का लाभ उठा सकता है।

यानी म्यूचुअल फंड से आप 500 से 1000 रुपए निवेश करके भी भारत की टॉप कंपनीयों में निवेश कर सकते हैं। वहीं अगर आप सीधे तौर पर निवेश करने जाएं तो आप ऐसा नहीं कर सकते।

म्यूचुअल फंड के नुकसान। Disadvantages of Mutual Funds

1. Risk :- क्योंकि म्यूचुअल फंड्स अपने पैसों को स्टॉक मार्केट में या debt securities में निवेश करते है। इसलिए इनके हर प्रकार के निवेश पर जोखिम बना रहता है। जैसे स्टॉक मार्केट के चढ़ उतार से equity में किए निवेश पर जोखिम होता है और Debt securities में ब्याज दरों में आने वाले चढ़ उतार से Debt fund जोखिम के अधीन होते हैं।

2. High cost :- म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए mutual funds आपसे एक निश्चित शुल्क चार्ज करते है। जो कि सेबी नियम के अनुसार अधिकतम 2.25% तक का हो सकता है। यह शुल्क आपको बिना किसी फिक्स रिटर्न की अपेक्षा किए देना पड़ता है।

इसकी तुलना अगर आप सीधे तौर पर स्टॉक मार्केट या कहीं और पर निवेश किए जाने वाले तरीके से करें तो यह शुल्क हमें काफी ज्यादा लगता है। लेकिन बिना किसी जानकारी और नॉलेज के आपको एक अच्छा निवेश करने के लिए यह शुल्क देना आवश्यक है।

3. Over-diversification :- निवेशकों के लिए portfolio को diversifi करना जरूरी होता है। अगर आप पहले से अपने पैसों को कहीं पर निवेश करते आ रहे हैं और diversification के लिए आप अपने पैसों को mutual fund में निवेश करना चाहते हैं, तो हो सकता है वह म्यूचुअल फंड भी अपना पैसा उसी संपत्ति में लगाएं जहां पर आपने पहले से निवेश किया है। ऐसा होने पर आपके diversification का निर्णय गलत हो सकता है।

इसलिए किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले उस उस म्यूचुअल फंड के portfolio को हमें अच्छे से समझना चाहिए कि वह किस तरह की संपत्तियों में निवेश करता है।

4. Exit Load :- ज्यादातर म्यूचुअल फंड्स निवेशकों को म्यूचुअल फंड से बाहर निकलने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करते हैं। इससे पहले अगर कोई निवेशक म्यूचुअल फंड को बेचता है तो म्यूचुअल फंड उसपर एक early exit charge (शुल्क) लगाता है। जिससे कोई निवेशक उस निश्चित समय सीमा से पहले म्यूचुअल फंड से बाहर ना निकले। यह समय आम तौर पर एक साल का होता है।

इसकी तुलना में सीधे तौर पर स्टॉक मार्केट में निवेश करने पर आपको ऐसा कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है।

हालांकि यह चार्ज निवेशकों के हितों के लिए ही लगाया जाता है। जिससे निवेशक लंबे समय तक निवेश करें और उन्हें अच्छा रिटर्न मिलें।

5. Performance :- एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार म्यूचुअल फंड्स अच्छा रिटर्न जनरेटर करने में कामयाब नहीं है। ज्यादातर म्यूचुअल फंड्स स्टॉक मार्केट के Index “nifty 50, sensex” जैसे index से ज्यादा रिटर्न कभी जनरेटर कर ही नहीं पाते हैं।

इसलिए Warren buffet जो कि दुनिया के सबसे बड़े निवेशक है, वह नए निवेशकों को Index fund में निवेश करने की सलाह देते हैं।

म्यूचुअल फंड को कैसे चुनें? How To select mutual fund

Mutual Fund को समझने के बाद लोगों द्वारा सबसे ज्यादा पुछा जानें वाला सवाल होता है, “बेस्ट म्यूचुअल फंड को कैसे चुनें” जो कि एक महत्वपूर्ण सवाल है।

किसी भी चीज़ को चुनने के लिए उस चीज़ से रिलेटेड कुछ बातों को देखना जरूरी होता है। वैसे ही म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव करने के लिए भी हमें कुछ चीजों को देखना जरूरी होता है। जिसके बाद हम किसी फंड में निवेश करने का निर्णय ले सकते हैं।

जब आपको किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करना हो तो सबसे पहले यह तय करना है कि आपको किस प्रकार के म्यूचुअल फंड में निवेश करना है। आप अपने जोखिम लेने कि शमता के आधार पर म्यूचुअल फंड का चुनाव कर सकते हैं।

जैसे कि अगर आप ज्यादा जोखिम लेने कि शमता रखते हैं तो आप equity mutual fund में निवेश कर सकते हैं। अगर आप मीडियम जोखिम लेने कि शमता रखते हैं तो आप Hybrid mutual fund में निवेश कर सकते हैं वैसे ही अगर आप ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहता तो आप debt mutual fund में निवेश कर सकते हैं।

यह तय करने के बाद आपको इसी कैटेगरी (category) में कौन से कंपनी का कौन सा म्यूचुअल फंड अच्छा है यह देखना होगा। इसी कैटेगरी के सारे म्यूचुअल फंड्स तुलना करके आपको एक अच्छे म्यूचुअल फंड का चुनाव करना है।

अब इस तुलना में आपको क्या क्या देखना है चलिए जानते हैं।

किसी Mutual Fund में निवेश करने से पहले जानने योग्य बातें :

1. Fund Manager :- किसी म्यूचुअल फंड को चुनने से पहले आपको उस म्यूचुअल फंड को मैनेज करने वाले फंड मैनेजर के बारे जानना जरूरी है। आपको उसके बारे में यह जानना चाहिए कि उस फंड मैनेजर के पास portfolio manegement का कितना Experience यानी अनुभव है, उसने मैनेज किए फंड्स ने कैसे रिटर्न्स दिए हैं।

2. Past Returns :- किसी म्यूचुअल फंड का चुनाव करने से पहले उस fund के पिछले कुछ सालों का ट्रैक रिकॉर्ड आपको देखना चाहिए। जिससे आपको कितना रिटर्न मिल सकता है इसका थोड़ा अंदाजा आप लगा सकते हैं।

पर ध्यान रहे सिर्फ पिछले सालों के रिटर्न्स को देखकर कभी भी किसी म्यूचुअल फंड में निवेश नहीं करना चाहिए। इसके साथ आपको और भी बाकी चीजों को देखना है।

3. Category :- जैसे कि हमने ऊपर बताया कि किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले हमें यह देखना चाहिए कि वह म्यूचुअल फंड अपने पैसों को किस कैटेगरी की संपत्तियों में निवेश करता है। इससे आपको अपना पैसा कहां पर निवेश हो रहा है यह जानने को मिलेगा।

4. Mutual Fund Company :- जब अपने पैसों को कहीं पर निवेश करने की बात हो तो भरोसा सबसे बड़ी बात बन जाती है। इसलिए आपको सिर्फ ऐसी AMC’S – Asset Manegement company’s के म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए जो लंबे समय से मार्केट में है। अगर कोई नई कंपनी आपको ज्यादा रिटर्न देने का भरोसा देती है तो आपको ऐसी कंपनियों से दुर रहना चाहिए।

भारत में trusted म्यूचुअल फंड कंपनीज़ के कुछ उदाहरण :- SBI Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund, UTI Mutual Fund, HDFC Mutual Fund, Tata Mutual Fund इनके अलावा भी और भी अच्छी कंपनीयां मार्केट में है।

5. Expense Ratio :- Mutual Fund में निवेश करने से पहले एक और जरूरी बात जो आपको जानना जरूरी है वह है म्यूचुअल फंड का expense ratio जो ज्यादा नहीं होना चाहिए। भारत में म्यूचुअल फंड का expense ratio 0.5 से 2.25 तक के बीच में होता है। आमतौर पर 1% से ज्यादा का expense ratio ज़्यादा माना जाता है।

इसलिए अगर आपको किसी से कैटेगरी के दो म्यूचुअल फंड में किसी एक का चुनाव करना है तो आपको कम expense ratio वाले म्यूचुअल फंड का चुनाव करना चाहिए।

पर ध्यान रहे expense ratio के साथ साथ दोनों का performance भी आपको देखना है।

Mutual Funds में निवेश करने के तरीके।

Mutual Fund का चुनाव करने के बाद अब बात यह आती है कि हम म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे कर सकते हैं? तो आपको बता दें कि किसी भी म्यूचुअल फंड में आप दो तरीकों से अपना पैसा निवेश कर सकते हैं।

वह दो तरीके क्या हैं चलिए जानते है :

1. Lump sum :- म्यूचुअल फंड में निवेश करने का पहला तरीका यह है कि आप अपने पैसों का Lumpsum तरीके से mutual fund में निवेश करें। Lump sum अगर आप एक साथ बहुत बड़ी रकम को म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आप ऐसा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपको अपने 5 लाख रुपए म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आप Lump sum यानी एक साथ 5 लाख रुपए म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।

2. SIP :- म्यूचुअल फंड में निवेश करने के दुसरा तरीका है SIP यानी Systematic Investment Plan के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। ज्यादातर लोग म्युच्युअल फंड में निवेश करने के लिए SIP का उपयोग करते हैं।

SIP में आप म्यूचुअल फंड में एक साथ बड़ी अमाउंट को निवेश ना करके एक निश्चित समय सीमा में थोड़े थोड़े पैसों को निवेश करते जाते हैं। SIP से आप 500 से 1000 रुपए से भी किसी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।

म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे करें? How to invest in mutual funds in Hindi

Mutual Funds के बारे में सब जानने के बाद अब आप किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड में निवेश करें कैसे?

किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने के तीन तरीके है।

म्यूचुअल फंड में निवेश कैसे करें।
How to Invest in Mutual Funds

1) Mutual Fund कंपनी के वेबसाईट पर जाकर आप Direct म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए आपको जिस म्यूचुअल फंड में निवेश करना है उस कंपनी की वेबसाइट पर जाकर अपना अकाउंट खोलना है फिर आप उनके म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।

इस तरीके से निवेश करने पर आप Direct Plan से निवेश करते है। जिससे आप बिना किसी एजेंट के निवेश करने की वजह से आपका एजेंट को मिलने वाला कमीशन बच जाता है।

2) दुसरा तरीका है आप किसी म्यूचुअल फंड एजेंट या दलाल से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। फिर आपको वह दलाल Regular Plan के जरिए निवेश करने की सुविधा देता है। जिससे उसे उसका कमिशन मिलता है। इस तरीके से निवेश करने पर आपको ज्यादा शुल्क देना पड़ता है।

3) तीसरा तरीका यह है कि आप अपने डिमैट अकाउंट से किसी भी म्यूचुअल फंड को खरीद सकते है। इसमें आप Direct Plan और Regular Plan दोनों तरीके के म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। डिमैट अकाउंट वह अकाउंट होता है जिससे निवेशक स्टॉक मार्केट में निवेश करते है। भारत का नं 1 स्टॉक ब्रोकर Zerodha से भी आप म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं।

सारांश।

इस तरीके से आज हमने Mutual Funds के बारे में जाना कि म्यूचुअल फंड्स होते क्या है। कितने प्रकार के म्यूचुअल फंड्स होते हैं, कैसे हम इनमें निवेश कर सकते हैं और mutual fund में निवेश करने से पहले हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

FAQ About Mutual Fund’s

क्या म्यूचुअल फंड में निवेश करना जोखिम भरा है?

हां! क्योंकि म्यूचुअल फंड निवेश, बाजार जोखिम के अधीन है, और वह अपना पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश करते है इसलिए म्यूचुअल फंड्स कभी-भी 100% सुरक्षित नहीं होते।

Mutual Fund में किसे निवेश करना चाहिए?

वैसे म्यूचुअल फंड में हर कोई निवेश कर सकता है। लेकिन जिन लोगों को स्टॉक मार्केट और अन्य प्रकार के Assets में अपने पैसों को निवेश करना है, लेकिन जिनके पास निवेश और स्टॉक मार्केट की जानकारी नहीं है ऐसे लोगों के लिए म्युचुअल फंड एक अच्छा विकल्प है अपने पैसों को निवेश करने का।

Mutual Funds में कितना रिटर्न मिलता है?

म्यूचुअल फंड्स आमतौर पर 15% से 25% या उससे ज्यादा का रिटर्न देते हैं।

क्या म्यूचुअल फंड में निवेश करना जोखिम भरा है?

हां! क्योंकि म्यूचुअल फंड निवेश, बाजार जोखिम के अधीन है, और वह अपना पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश करते है इसलिए म्यूचुअल फंड्स कभी-भी 100% सुरक्षित नहीं होते।

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